शिक्षक मार्गदर्शिका · पाठ 2
मक्खी को कैसे पता चलता है कि उसका मुँह किधर है
असली मक्खी के कंपास को इधर-उधर घुमाएँ और देखें कि उसे अपनी जगह पर क्या टिकाए रखता है।
पाठ का पता: wiredmind.app/hi/modules/compass
सीखने का लक्ष्य
छात्र देखते हैं कि न्यूरॉनों का एक छल्ला मक्खी की दिशा को सक्रियता के एक धब्बे के रूप में सँभालता है, और रिंग न्यूरॉनों का अवरोध उस धब्बे को उसकी जगह टिकाए रखता है।
आपको क्या चाहिए
साझा स्क्रीन से मदद मिलती है, पर यह ज़रूरी नहीं है: प्रोजेक्टर, टीवी या ऐसी कंप्यूटर स्क्रीन जिसे पूरी कक्षा देख सके। छात्रों को इंटरनेट से जुड़ा कोई भी डिवाइस चाहिए, बेहतर हो कि हर जोड़ी के लिए एक: लैपटॉप, टैबलेट या फ़ोन। कुछ इंस्टॉल नहीं करना है और कोई अकाउंट नहीं बनाना है। हर पाठ स्क्रीन पढ़ने के एक छोटे परिचय से खुलता है, और हर वैज्ञानिक शब्द पर टैप करके उसका मतलब देखा जा सकता है।
यह किन विषयों से जुड़ता है
- उत्तेजन और अवरोध
- तीनों पाठों में सबसे साफ़ उदाहरण। मोड़ न्यूरॉन कंपास को उत्तेजित करते हैं और उभार को आगे धकेलते हैं; रिंग न्यूरॉन उसे रोकते हैं और उभार को थामे रखते हैं।
- सिनैप्स और न्यूरोट्रांसमीटर
- अनुमान है कि रिंग न्यूरॉन GABA छोड़ते हैं, जो रोकने वाला ट्रांसमीटर है। कंपास और मोड़ न्यूरॉन एसिटिलकोलीन छोड़ते हैं, जो उत्तेजित करता है।
- नेटवर्क की बनावट व्यवहार को कैसे तय करती है
- कंपास न्यूरॉन एक छल्ले में जुड़े हैं, और इसी आकार की वजह से सक्रियता का एक उभार एक दिशा को दिखा पाता है।
45 मिनट की योजना
- 5 मिनट
शुरुआती प्रश्न
पूछें: “आँखें बंद करके एक बार घूम जाएँ। फिर भी आपको कैसे पता रहता है कि आपका मुँह किधर है?” फिर बताएँ कि मक्खी यह काम कोशिकाओं के एक छोटे छल्ले से करती है, और कक्षा अब उन्हें इधर-उधर धकेलकर देखेगी।
- 10 मिनट
“दिखाएँ, यह कैसे काम करता है” से डेमो
पाठ को कक्षा मोड में साझा स्क्रीन (प्रोजेक्टर, टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन) पर दिखाएँ और “दिखाएँ, यह कैसे काम करता है” दबाएँ। जैसे-जैसे हर चरण चले, उसे ज़ोर से पढ़ें। साझा स्क्रीन न हो, तो छात्र यही डेमो अपने डिवाइस पर खोलें। डेमो पाठ के प्रश्न पर रुक जाता है: उसे अभी बिना उत्तर के छोड़ दें।
- 20 मिनट
छात्र खुद खोजते हैं
छात्र जोड़ियों में, अपने डिवाइस पर, वर्कशीट के साथ काम करते हैं। वे हर टैप से पहले अपना अनुमान लिखते हैं, पाठ पूरा करते हैं, उसके प्रश्न का उत्तर देते हैं और खुला प्रयोग आज़माते हैं।
- 10 मिनट
चर्चा
पाठ के प्रश्न पर जोड़ियों के उत्तर इकट्ठा करें, फिर नीचे दिए चर्चा के प्रश्न लें। अंत में बताएँ कि मॉडल में क्या-क्या छूट गया है।
कहानी
द्रोर रोशनी की एक दरार की ओर बढ़ता है, हवा का झोंका उसे घुमा देता है, और वह वापस मुड़कर रास्ते पर आ जाता है। कहानी यह प्रश्न खड़ा करती है: दिमाग को कैसे पता चलता है कि उसके शरीर का मुँह किधर है?
पाठ मक्खी द्रोर की एक छोटी कॉमिक से खुलता है। पैनल ज़ोर से पढ़ें या छात्रों को पढ़ने दें; इसमें लगभग एक मिनट लगता है। इसका आख़िरी पैनल जीत वाली स्क्रीन पर फिर दिखता है।
मक्खी से न्यूरॉन तक ज़ूम
पाठ को प्रोजेक्टर पर दिखाएँ। चारों स्तरों में से हर एक पर रुकें और ज़ूम इन करने से पहले उसका प्रश्न पूछें। स्तर वाले बटन किसी भी स्तर पर ले जाते हैं, और आवर्धक लेंस वाला बटन पाठ में कहीं से भी ज़ूम दोबारा खोल देता है।
- मक्खी
मक्खी के पास न नक्शा है, न GPS। सीधे रास्ते पर बने रहने के लिए वह किसका सहारा ले सकती है?
- दिमाग
यहाँ अंदर बने कंपास को किन इंद्रियों की बात सुननी होगी?
- सर्किट
ये कोशिकाएँ एक छल्ला बनाती हैं। कंपास के लिए छल्ला अच्छा आकार क्यों हो सकता है?
- न्यूरॉन
यह एक दिशा-कोशिका है। अगर यह सक्रिय हो, तो आपके हिसाब से यह मक्खी के मुँह की दिशा के बारे में क्या बताती है?
शरीर और दिमाग दो अलग-अलग मक्खियों के हैं, जिन्हें उनके असली आकार में साथ दिखाया गया है। कक्षा को यह बताएँ।
अनुमान
शांत करने वाले चरण से पहले छात्र चुनते हैं कि उनके हिसाब से क्या होगा। पहले हाथ उठवाकर राय लें। कोई अंक नहीं मिलते, और गलत अनुमान से कोई नुकसान नहीं होता।
लैंडमार्क लाने वाले शांत होने वाले हैं। उभार क्या करेगा?
अपेक्षित उत्तर: वह अपनी जगह से भटक जाएगा।
दिशा-कोशिकाएँ सक्रिय बनी रहती हैं, इसलिए उभार गायब नहीं होता। पर उसे टिकाए रखने वाले लैंडमार्क न हों, तो वह अपनी जगह से खिसककर भटकने लगता है।
हर चरण में छात्रों को क्या दिखना चाहिए
- चरण 1
बाएँ मोड़ न्यूरॉनों (मुड़ने का सिग्नल) को सक्रिय करने के लिए “उत्तेजित करें” पर टैप करें। फिर कंपास डायल को देखें।
छल्ले के एक तरफ़ हरे कंपास न्यूरॉनों का एक धब्बा चमकता है, और डायल की सुई उसी की ओर इशारा करती है। वही धब्बा उभार है।
- चरण 2
अब दाएँ मोड़ न्यूरॉनों (दूसरा सिग्नल) के “उत्तेजित करें” बटन पर टैप करें। उभार पर नज़र रखें।
उभार डायल पर घूमता है। मुड़ने के दोनों सिग्नल उसे उलटी दिशाओं में धकेलते हैं।
- चरण 3
रिंग न्यूरॉनों (लैंडमार्क लाने वालों) को शांत करें। मक्खी जो देखती है, ये उसे अंदर लाते हैं। दाएँ मुड़ने का सिग्नल हम आपके लिए फ़ायर करेंगे।
बैंगनी रिंग न्यूरॉन बंद हों, तो वही सिग्नल उभार को एक जगह टिकने नहीं देता और वह भटकता रहता है।
- चरण 4
रिंग न्यूरॉनों (लैंडमार्क लाने वालों) के बटन पर दोबारा टैप करें और उन्हें फिर से चालू करें। हम मुड़ने का वही सिग्नल भेजेंगे।
उभार फिर से अपनी जगह टिक जाता है। डायल की तुलना पिछले चरण से करें।
पाठ का प्रश्न और अपेक्षित उत्तर
आपने लैंडमार्क लाने वालों (बैंगनी कोशिकाओं) को शांत किया। उभार क्यों भटक गया?
सही विकल्प: कंपास को पता ही नहीं चला कि लैंडमार्क कहाँ हैं, इसलिए उभार खिसक गया।
कंपास को किसी ने नहीं बताया कि लैंडमार्क कहाँ हैं, इसलिए उभार को उसकी जगह किसी ने नहीं थामा। मुड़ने का सिग्नल तब भी पहुँचा, क्योंकि हरी कोशिकाएँ चमकीं। यानी कमी इनपुट की नहीं, लंगर की थी। बड़े छात्रों के लिए: इस मॉडल में वह लंगर रिंग न्यूरॉनों का अवरोध है।
चर्चा के प्रश्न
- जो कोशिकाएँ दिशा का हिसाब रखती हैं, उनके लिए छल्ला एक अच्छा आकार क्यों है?
- रिंग न्यूरॉन दूसरी कोशिकाओं को उत्तेजित करने की जगह उन्हें शांत करते हैं। कोशिकाओं को बंद करना किसी नेटवर्क को बेहतर काम करने में कैसे मदद कर सकता है?
- अँधेरे या कोहरे में लोग भी दिशा का अंदाज़ा खो देते हैं। इसमें और “शांत करें” वाले चरण में क्या समानता है?
आम गलतफ़हमियाँ
छात्र सोच सकते हैं: मक्खी के पास चुंबकीय कंपास होता है, जैसा फ़ोन में होता है।
इसे कैसे सुलझाएँ: यह कंपास सक्रियता का एक पैटर्न है, जिसे मक्खी अपने मुड़ने से और अपनी देखी हुई चीज़ों से बदलती रहती है। इस सर्किट में कुछ भी चुंबकत्व को महसूस नहीं करता।
छात्र सोच सकते हैं: जितनी ज़्यादा कोशिकाएँ सक्रिय हों, सिग्नल हमेशा उतना ही बेहतर होता है।
इसे कैसे सुलझाएँ: आख़िरी दो चरणों की तुलना करें: अवरोध हटाने से कंपास और बिगड़ गया। अवरोध सर्किट के काम करने के तरीके का हिस्सा है।
छात्र सोच सकते हैं: उभार कोई चीज़ है जो दिमाग में घूमती-फिरती है।
इसे कैसे सुलझाएँ: कोई कोशिका अपनी जगह से नहीं हिलती। पड़ोसी कोशिकाएँ बारी-बारी से सक्रिय होती हैं, जैसे स्टेडियम की भीड़ में चलती लहर।
क्या असली है और क्या सरल किया गया है
असली
- पाठ का हर न्यूरॉन और हर जुड़ाव एक असली फल मक्खी के वायरिंग डायग्राम से लिया गया है, और कोशिकाओं की हर जोड़ी के बीच सिनैप्स की संख्या भी असली है।
- कंपास न्यूरॉन, मोड़ न्यूरॉन और रिंग न्यूरॉन असली कोशिका प्रकार हैं, और वैसे ही छल्ले में जुड़े हैं जैसे मक्खी में।
सरल किया गया
- गतिविधि एक सरल सिमुलेशन है, जिसमें हर न्यूरॉन एक जैसे बुनियादी नियमों पर चलता है, और यह स्लो मोशन में चलती है।
- मॉडल में रिंग न्यूरॉन दुनिया की कोई तस्वीर नहीं लाते। उन्हें शांत करने से उनका अवरोध हट जाता है, और इसी से उभार खिसकने लगता है।
- डायल हमारा अपना तरीका है हरी कोशिकाओं की सक्रियता पढ़ने का। मक्खी के पास कोई डायल नहीं होता।
मुख्य शब्द
- मोड़ न्यूरॉन.
- वे तंत्रिका कोशिकाएँ जो मक्खी के मुड़ने पर सक्रिय होती हैं और उभार को कंपास पर आगे धकेलती हैं। वैज्ञानिक इन्हें P-EN2 न्यूरॉन कहते हैं।
- कंपास न्यूरॉन.
- तंत्रिका कोशिकाओं का एक छल्ला, जो याद रखता है कि मक्खी का मुँह किस ओर है। वैज्ञानिक इन्हें E-PG न्यूरॉन कहते हैं।
- सक्रियता का उभार.
- सक्रिय कंपास न्यूरॉनों का धब्बा। छल्ले पर इसकी जगह बताती है कि मक्खी का मुँह किस ओर है।
- रिंग न्यूरॉन.
- वे तंत्रिका कोशिकाएँ जो मक्खी की देखी हुई चीज़ें, जैसे लैंडमार्क, कंपास तक लाती हैं। ये कंपास न्यूरॉनों को शांत करती हैं, जिससे उभार अपनी जगह टिका रहता है।
- लैंडमार्क.
- मक्खी को दिखने वाली कोई चीज़ जो अपनी जगह पर रहती है, जैसे सूरज या पेड़। मक्खी इससे अपनी दिशा की समझ स्थिर रखती है।
- प्रोटोसेरेब्रल ब्रिज.
- मक्खी के दिमाग का छड़ जैसा हिस्सा, प्रोटोसेरेब्रल ब्रिज। कंपास न्यूरॉन और मोड़ न्यूरॉन, दोनों इससे होकर गुज़रते हैं।
पाठ्यक्रम से मेल
यह हिस्सा अभी भरा नहीं गया है। जीव विज्ञान के आधिकारिक पाठ्यक्रम से इसका मेल जीव विज्ञान के शिक्षकों के साथ जाँचा जा रहा है।